अध्याय 2 चलो तलाक लेते हैं
अस्पताल के कमरे का दरवाज़ा चरमराता हुआ खुला।
हैरिसन अंदर आया। मिरांडा को होश में देखकर उसके चेहरे पर राहत झलक गई।
“मिरांडा, आखिर तुम उठ गईं। भगवान का शुक्र है तुम ठीक हो।”
वह बिस्तर के पास आया, आवाज़ में थकान साफ़ थी।
“वहाँ हालात बहुत बेकाबू हो गए थे। अपहरणकर्ता मानसिक तौर पर अस्थिर था। मेरा प्लान था उसे शांत करूँ, पहले एरिआना को छुड़वाऊँ, फिर सोचूँ कि तुम्हें कैसे बचाया जाए।”
मिरांडा चुपचाप सुनती रही, चेहरा निर्विकार—जैसे वह किसी और की कहानी सुन रही हो।
उसने आँखें उठाईं, उसकी निगाह से मिलाया—खाली-सा घूरता हुआ, और उसकी आवाज़ बैठी हुई, पर शांत थी।
“हैरिसन व्हिटमोर, बच्चा नहीं रहा।”
“मेरा गर्भपात हो गया।”
हैरिसन की पुतलियाँ एक झटके में सिकुड़ गईं। वह कुछ कहने ही वाला था कि—
“आह!”
कमरे के बाहर से एक तीखी चीख सुनाई दी, फिर किसी चीज़ के टूटने की आवाज़।
हैरिसन का हाव-भाव पल भर में बदल गया। वह मुड़ गया।
“एरिआना के साथ कुछ हुआ होगा। मुझे जाकर देखना पड़ेगा!”
वह जाते-जाते बस इतना कह गया, “तुम्हारी हालत पर बाद में बात करेंगे,” और बिना पीछे देखे दौड़ता हुआ बाहर निकल गया।
“बाद में? ठीक है।”
मिरांडा ने धीमे से वही शब्द दोहराए, होंठों पर कड़वी मुस्कान उभर आई।
उसकी परेशानियाँ तो हमेशा इंतज़ार कर सकती थीं।
एक और आँसू चुपचाप गिरा, उसकी फीकी हथेली पर आकर ठहर गया।
उसने तकिए के पास रखा फोन धीरे-धीरे उठाया। उसे इतनी कसकर पकड़ा कि उँगलियों के पोर सफेद पड़ गए, और एक नंबर मिलाया—जो उसे रटा हुआ था।
कॉल तुरंत लग गई। उधर से एक आदमी की स्थिर, फिक्रभरी आवाज़ आई।
“तुम जाग गई हो?”
मिरांडा ने गहरी साँस ली, अपनी बची-खुची ताकत समेटकर शांत रहने की कोशिश की।
“क्रिश्चियन।”
“मुझे डिवोर्स के कागज़ात बनवाने हैं।”
शाम हो गई। मिरांडा को अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
टैक्सी एक परिचित-सी कोठी के सामने जाकर रुकी। यही वह घर था जहाँ वह हैरिसन के साथ रहती थी।
लेकिन अब वह जगह उसे बस ठंडी और अनजान लग रही थी।
उसने दरवाज़ा धकेलकर खोला। ड्रॉइंग रूम से हँसी की आवाज़ आ रही थी।
हैरिसन सोफ़े पर बैठा सेब छील रहा था। उसके पास एरिआना बैठी थी—चेहरा पीला, जैसे किसी भयानक हादसे से किसी तरह बचकर लौटी हो—बेहद बेबस और दयनीय।
दृश्य तस्वीर की तरह सुकूनभरा था, मगर मिरांडा की आँखों में चुभ गया।
अपहरण और गर्भपात के बाद यह दूसरी बार था जब उसने अपने पति को देखा था।
दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनकर हैरिसन ने ऊपर देखा। मिरांडा को देखते ही उसकी भौंह हल्की-सी सिकुड़ गई।
“तुम आ गईं।”
उसका लहजा सपाट था, जैसे किसी गैरज़रूरी मेहमान का स्वागत कर रहा हो।
उसने चाकू रख दिया और खड़ा हो गया। आवाज़ में सख्ती आ गई।
“एरिआना बहुत बड़े सदमे से गुज़री है। मानसिक हालत ठीक नहीं है। डॉक्टर ने कहा है कि उसे ठीक होने के लिए जाना-पहचाना, शांत माहौल चाहिए।”
“तो वह कुछ दिन यहीं रहेगी।”
मिरांडा ने कुछ नहीं कहा। बस उसे चुपचाप देखती रही।
हैरिसन ने उसकी नज़र से बचते हुए आगे कहा, “मैंने एरिआना के लिए मास्टर बेडरूम खाली कर दिया है। तुम ऊपर वाला गेस्ट रूम ले लो।”
मास्टर बेडरूम।
उनका वैवाहिक कमरा।
वहाँ का हर फर्नीचर उसने खुद चुना था।
मिरांडा के गले में जैसे रूई भर गई हो। बोलते वक्त उसकी आवाज़ सूखी थी।
“हैरिसन, वो हमारा कमरा है।”
एरिआना की आँखें तुरंत लाल हो गईं। वह कमजोर-सी उठी और हैरिसन की बाँह पकड़कर उसकी आस्तीन खींचने लगी।
“हैरिसन, क्या ये नहीं चाहतीं कि मैं यहाँ रहूँ?”
“अगर इन्हें अच्छा नहीं लग रहा, तो मुझे चले जाना चाहिए। मैं तुम दोनों के बीच झगड़ा नहीं करवाना चाहती।”
वह रो पड़ने ही वाली लग रही थी और मुड़कर जाने लगी।
हैरिसन ने उसका हाथ पकड़ लिया। फिर वह मिरांडा की ओर मुड़ा—चेहरा सख्त, आँखों में शिकायत भरी।
“मिरांडा!”
उसने उसका नाम झिड़ककर उछाला।
"एरियाना परिवार है। अभी उसे देखभाल की ज़रूरत है!"
उसने एरियाना को अपने पीछे ऐसे खड़ा कर लिया जैसे कोई अडिग क़िला।
"तुम यहीं रहोगी, और बस—फैसला हो गया!"
ये बात एरियाना के लिए थी।
"मेरी इजाज़त के बिना कोई तुम्हें यहाँ से नहीं निकाल सकता।"
ये बात मिरांडा के लिए थी।
उसे यूँ एरियाना की ढाल बनते देख मिरांडा को लगा जैसे किसी अदृश्य हाथ ने उसका दिल मरोड़ दिया हो—इतना कि उसे साँस लेना मुश्किल हो गया।
मिरांडा का चेहरा फीका पड़ गया और वह कुछ बोल नहीं पाई, तो हैरिसन की आवाज़ में चिड़चिड़ाहट बढ़ गई।
"तुम तो आमतौर पर बड़ी शांत रहती हो। इस पर ऐसे जलनखोर औरतों की तरह मत बनो। बहुत भद्दा लगता है।"
जलनखोर औरत?
मिरांडा ने उस शब्द को मन में पलटा—होठों पर कड़वी-सी मुस्कान आ गई।
"एरियाना अभी कमज़ोर है। उसके लिए कुछ खाने को बना दो।"
हैरिसन ऐसे बोला जैसे हुक्म दे रहा हो।
वह चाहता था कि वह—जिसका अभी गर्भपात हुआ था, जो अभी ठीक भी नहीं हुई थी—उस औरत के लिए खाना बनाए जिसकी वजह से उसका बच्चा चला गया?
मिरांडा अचानक हँस पड़ी। हँसी सूखी, तंज़ भरी।
"हैरिसन, चलो तलाक़ कर लेते हैं।"
उसकी आवाज़ ऊँची नहीं थी, लेकिन बैठक के हर कोने में साफ़ गूँज गई।
"मेरा भाई काग़ज़ात और वकील लेकर रास्ते में है।"
हैरिसन सन्न रह गया, जैसे समझ ही नहीं पाया कि उसने क्या कहा।
"तुमने क्या कहा अभी?"
उसकी भौंहें सिकुड़ गईं, चेहरे पर अविश्वास था।
"मैंने बस खाने को कहा और तुम तलाक़ की बात कर रही हो?"
उसके मुँह से शब्द निकले ही थे कि एक दूसरी आवाज़ ने हवा को चीर दिया।
"हाँ, तलाक़।"
दरवाज़े पर से एक ठंडी आवाज़ आई।
विला का दरवाज़ा झटके से खुला। क्रिश्चियन लैंकेस्टर काले सूट में तेज़ क़दमों से अंदर आया, चेहरा पत्थर की तरह सख़्त।
उसके पीछे मिरांडा के माता-पिता—अरबेला लैंकेस्टर और डॉमिनिक लैंकेस्टर—आए, और साथ ही हैरिसन के माता-पिता भी।
दोनों परिवार पूरी ताक़त के साथ पहुँच चुके थे।
क्रिश्चियन सीधे मिरांडा के पास गया, अपनी बहन के आगे ढाल बनकर खड़ा हो गया और हैरिसन को ठंडी नज़र से घूरा।
उसने ब्रीफ़केस से एक दस्तावेज़ निकाला और कॉफ़ी टेबल पर पटक दिया।
"अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड।"
"मेरी बहन का गर्भपात हुआ है। वह शारीरिक रूप से कमज़ोर है। और तुम—उसके पति—उसके पास होने की बजाय यहाँ किसी दूसरी औरत की सेवा में लगे हो?"
"हैरिसन, हमने अपनी बेटी की शादी तुमसे इसलिए नहीं की थी कि वह तुम्हारे घर की नौकरानी बने, और बिल्कुल भी नहीं कि उसकी ऐसी बेइज़्ज़ती हो!"
क्रिश्चियन की हर बात में ग़ुस्सा भरा था।
"हम व्हिटमोर परिवार से अब कोई रिश्ता नहीं रख सकते!"
मिरांडा की माँ अरबेला पहले ही रो रही थी। वह दौड़कर आई और अपनी दुबली बेटी को बाँहों में भर लिया, उसका पूरा शरीर दिल टूटने से काँप रहा था।
"मेरी मिरांडा… मेरी बच्ची…"
ये सब देखकर एरियाना का चेहरा और पीला पड़ गया। वह सहमी-सहमी आगे बढ़ी।
"आंटी, अंकल…"
अरबेला ने जैसे सुना ही नहीं। वह बस मिरांडा को पकड़े रोती रही।
लेकिन मिरांडा के पिता डॉमिनिक ने आह भरी और बोल पड़े।
"हम सबने एरियाना को बचपन से बढ़ते देखा है। उसका पिता जेल में है। उसकी माँ ने उसे अकेले पाला है। सच में, बड़ी दुख की बात है।"
पल भर में बैठक में सब चुप हो गए।
मिरांडा का सिर झट से ऊपर उठा। उसने अविश्वास से अपने पिता को देखा।
ऐसे वक़्त में—क्या उन्हें अपनी उस बेटी की चिंता नहीं होनी चाहिए थी जिसका अभी बच्चा चला गया और जिसके पति ने उसे धोखा दिया?
वह एरियाना के लिए क्यों बोल रहे थे?
मिरांडा की नज़र उसके पिता और एरियाना के बीच आती-जाती रही, जो बेबस होकर रो रही थी।
इतने सालों में उनके परिवार ने कभी एरियाना के पिता को देखा तक नहीं था।
मिरांडा के मन में एक हास्यास्पद और डरावना ख़याल बीज की तरह जड़ पकड़ने लगा।
